मुस्कुराएं 😃
महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न: विश्वविद्यालयों (जामियात) के शिक्षक इस समस्या के बारे में क्या कहते हैं कि जब भी किसी किताब या व्याख्या (शरह) का अध्ययन शुरू करें, तो गहरी नींद का ग़लबा (असर) क्यों हो जाता है?
उत्तर... (जिसमें सच्चाई भी है और मज़ाक भी)
शोध (अनुसंधान) से यह बात सामने आई है कि लेखकों और टीकाकारों (مصنفین اور شارحین) ने अपनी कृतियों को रातों की नींदें क़ुर्बान करके और रतजगा बर्दाश्त करके लिखा है।
लिहाज़ा, उनके ज़िम्मे जितनी भी नींद लाज़मी (बाक़ी) थी जो उन्होंने पूरी नहीं की, अब उसकी क़ज़ा (भरपाई) करना हम पर लाज़मी हो जाता है!
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