इब्न-ए-आदम (इंसान) पर अजीब तरीन नेमतों में से एक भूल जाने की नेमत भी है।
क्योंकि अगर भूलने का अमल ना होता तो इंसान किसी (तकलीफ़, ग़म) को ना भूल पाता, ना ही उसकी हसरत कभी ख़त्म होती, ना किसी मुसीबत पर उसे सब्र आता, ना उसका ग़म मरता, और ना उसकी नफ़रत और ग़ुस्सा कभी ख़त्म होता, ना ही वह दुनिया की किसी भी चीज़ से लुत्फ़ अन्दोज़ हो पाता कि हर वक़्त आफ़ात की याद में खोया रहता।
मनक़ूल (उद्धृत)