मलफ़ूज़: ख़ुदा तक पहुंचने का आसान रास्ता
*मलफ़ूज़ात-ए-हकीम-...
Ummah Post
24 April, 2026

मलफ़ूज़: ख़ुदा तक पहुंचने का आसान रास्ता

*मलफ़ूज़ात-ए-हकीम-उल-उम्मत मुजद्दिद-उल-मिल्लत हज़रत मौलाना मुहम्मद अशरफ़ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह*

*ख़ुदा तक पहुंचने का आसान रास्ता*

इरशाद फ़रमाया कि हम को अपनी नाक़िस (अधूरी) हालत पर क़नाअत (संतोष) न करनी चाहिए बल्कि कमाल-ए-दीन (दीन की पूर्णता) हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए, जिसका तरीक़ा यह है कि आमाल को कामिल (बेहतर) किया जाए, फ़राइज़ व वाजिबात के बजा लाने में कोताही न हो, मुहर्रमात (हराम कामों) का इर्तिकाब न हो और आमाल के कामिल करने में जो नफ़्स की मुज़ाहमत (रुकावट) मानए होती है, उसका इलाज कामिलीन (पहुंचे हुए बुज़ुर्गों) की सोहबत इख़्तियार करना है। उनके पास जाना चाहिए और जा न सके तो उनसे ख़त व किताबत (पत्र-व्यवहार) का तअल्लुक़ रखा जाए जिसमें फ़ुज़ूल क़िस्से न लिखें बल्कि अपने को मरीज़ और उनको तबीब (डॉक्टर) समझ कर अपने हालात से उनको इत्तिला करते रहें। फिर उसके बाद जो कुछ वह बतलावें उस पर अमल करें और उनके अहकाम का इत्तिबा (पालन) करें। बस यह रास्ता है ख़ुदा तक पहुंचने का जिससे ज़्यादा आसान रास्ता कोई नहीं बतला सकता।

(अल-कमाल फ़िद्दीन लिर्रिजाल, मवाइज़-ए-अशरफ़िया, जिल्द 1, सफ़हा 260)

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