बात तो सारी तौफ़ीक़ (ईश्वरीय प्रेरणा) की होती है,
वरना किसकी जुर्रत कि
कायनात (सृष्टि) बनाने वाले के सामने सर न झुकाए।
सजदा बहुत बड़ी तौफ़ीक़ है,
और फिर तौफ़ीक़ की अता (मिलना) बहुत बड़ी अता होती है।!!🥹🫀
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बात तो सारी तौफ़ीक़ (ईश्वरीय प्रेरणा) की होती है,
वरना किसकी जुर्रत कि
कायनात (सृष्टि) बनाने वाले के सामने सर न झुकाए।
सजदा बहुत बड़ी तौफ़ीक़ है,
और फिर तौफ़ीक़ की अता (मिलना) बहुत बड़ी अता होती है।!!🥹🫀
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