बात तो सारी तौफ़ीक़ (ईश्वरीय प्रेरणा) की होती है,
वरना किसक...
Ummah Post
25 April, 2026

बात तो सारी तौफ़ीक़ (ईश्वरीय प्रेरणा) की होती है,

वरना किसकी जुर्रत कि

कायनात (सृष्टि) बनाने वाले के सामने सर न झुकाए।

सजदा बहुत बड़ी तौफ़ीक़ है,

और फिर तौफ़ीक़ की अता (मिलना) बहुत बड़ी अता होती है।!!🥹🫀

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एक बुजुर्ग की लोग उनके मुंह पर तारीफ कर रहे थे
लेख

एक बुजुर्ग की लोग उनके मुंह पर तारीफ कर रहे थे

मौलाना फखरुल हसन साहब गंगोही रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं कि मैं मक्का मुअज्जमा में एक बुजुर्ग की खिदमत में हाजिर हुआ, लोग उनके मुंह पर उनकी तारीफ कर रहे थे और वह खुश हो रहे थे। मैंने अपने दिल में कहा, 'यह कैसे बुजुर्ग हैं जो अपनी तारीफ से मजे ले रहे हैं!' उन्हें इस खयाल की इत्तिला हो गई, उन्होंने फौर...