विद्यार्थी ध्यान दें
विद्यार्थी को तो दोस्ती से बहुत ही दूर रहना चाहिए। यह बीमारी ज्ञान प्राप्ति में भी रुकावट बनती है, शेख-उल-हदीस मौलाना मुहम्मद ज़करिया (रह.) फ़रमाते थे: कि मेरे पिता मौलाना यह्या फ़रमाया करते थे कि विद्यार्थी कितना ही मंदबुद्धि (कमज़ोर दिमाग वाला) क्यों न हो, अगर उसे दोस्ती लगाने की बीमारी नहीं है तो वह कभी न कभी मंज़िल पर पहुँच ही जाएगा। और कोई विद्यार्थी कितना ही बुद्धिमान क्यों न हो, अगर उसे दोस्ती लगाने की बीमारी है तो वह कभी भी मंज़िल पर नहीं पहुँच सकेगा।
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