हर गुनाह की एक क़ीमत है

दुनिया में कोई चीज़ मुफ़्त नहीं म...
Ummah Post
29 August, 2026

हर गुनाह की एक क़ीमत है

दुनिया में कोई चीज़ मुफ़्त नहीं मिलती, फिर गुनाह कैसे बिना क़ीमत का हो सकता है?

हर गुनाह इंसान से कुछ न कुछ ज़रूर छीन लेता है; कभी दिल का सुकून, कभी इबादत की लज़्ज़त, कभी इज़्ज़त, कभी बरकत, और कभी अल्लाह की क़ुर्बत (निकटता)।

गुनाह करते वक़्त इंसान लमहों की ख़्वाहिश पूरी करता है, मगर उसकी क़ीमत अक्सर बरसों की नदामत (पछतावा) बन जाती है।

अक़्लमंद वह है जो गुनाह के वक़्ती (क्षणिक) लत्फ़ के बजाए उसकी छुपी हुई क़ीमत को पहचान ले।

ऐ अल्लाह! हमें हर उस गुनाह से महफ़ूज़ फ़रमा जो तेरी नाराज़गी का सबब बने, हमारे दिलों को अपनी इतअत (आज्ञाकारिता) से ज़िंदा रख, हमारी लग़ज़िशों (ग़लतियों) को मुआफ़ फ़रमा, और हमें ऐसी ज़िंदगी अता फ़रमा जो तेरी रज़ा और तेरी क़ुर्बत का ज़रिया बने। आमीन।

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