अल्लाह के मददगारों और उसकी मदद व समर्थन के हकदार लोगों की विशेषताएं यह हैं कि अगर उन्हें दुनिया में शासन और हुकूमत बख्शी जाए, तो उनका व्यक्तिगत चरित्र अवज्ञा और अहंकार के बजाय नमाज़ कायम करना (इकामते-सलात) हो। उनकी दौलत अय्याशियों और वासनाओं के बजाय जकात देने (इताए-जकात) में खर्च हो। उनकी सरकार नेकी को दबाने के बजाय उसे बढ़ावा देने की सेवा करे और उनकी ताकत बुराइयों को फैलाने के बजाय उन्हें दबाने में इस्तेमाल हो। मगर यह फैसला कि ज़मीन का इंतज़ाम किस वक्त किसे सौंपा जाए, अल्लाह ही के हाथ में है। मगरूर (अहंकारी) बंदे इस गलतफहमी में हैं कि ज़मीन और उसके बाशिंदों की किस्मत के फैसले करने वाले वे खुद हैं। मगर जो ताकत एक ज़रा से बीज को विशाल पेड़ बना देती है और एक विशाल पेड़ को सूखी लकड़ी में बदल देती है, उसी को यह कुदरत (शक्ति) हासिल है कि जिनके दबदबे को देखकर लोग सोचते हों कि भला इनको कौन हिला सकेगा, उन्हें ऐसा गिराए कि वे दुनिया के लिए इब्रत (नसीहत) का नमूना बन जाएं, और जिन्हें देखकर कोई गुमान भी न कर सकता हो कि ये भी कभी उठ सकेंगे, उन्हें ऐसा सरबुलंद (उच्च) करे कि दुनिया में उनकी अज़मत और बुज़ुर्गवार के डंके बज जाएं।
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