एक बीवी को
पता चला कि उसका शौहर दूसरी शादी का इरादा रखता है तो उसने एक दिन बड़े एहतिमाम से अशाईया (रात का खाना) तैयार किया और चार अंडे उबालकर हर एक को अलग-अलग रंग से रंगा और शौहर को पेश कर दिया।
शौहर ने पहले हैरानी से रंग-बिरंगे अंडों को और फिर इस्तिफ़हामिया (सवालिया) नज़रों से बीवी की तरफ़ देखा।
बीवी ने कहा आप खाएँ और फिर बताएँ कि आपको ये रंग-बिरंगे अंडे कैसे लगे?
शौहर ने तीन अंडे खाए और तअज्जुब से बोला कि इनमें तो कोई फ़र्क़ नहीं, सबका यकसाँ ज़ायक़ा है, रंगों का क्या फ़ायदा?
बीवी चालाक लोमड़ी की मानिंद मुस्कुराई और गोया हुई "सरताज! औरतें भी सब एक जैसी ही होती हैं, बस रंगों का फ़र्क़ होता है।"
शौहर ने चौथा अंडा मुँह में ठूँसा, इत्मीनान से निगलकर डकार ली और बोला
"हाँ सच कहती हो, रंगों का ही फ़र्क़ होता है, लेकिन क्या करें कमबख़्त जब तक चारों अंडे खा न लिए जाएँ, पेट नहीं भरता है 🤭🤣😝