मदद करने का अनोखा अंदाज़ 😆
जब मैं पहली बार सुपरफास्ट ट्रेन में सवार हुआ और पहले से मौजूद यात्रियों से पूछा कि "मुरादाबाद कब आएगा? मुझे उतरना है।"
तो यात्रियों ने बताया कि, "भाई! यह सुपरफास्ट गाड़ी है, मुरादाबाद में नहीं रुकती। मुरादाबाद से गुज़रेगी मगर रुकेगी नहीं।"
यह सुनकर मैं घबरा गया... 😟 यात्रियों ने कहा, "घबराओ नहीं! मुरादाबाद में रोज़ यह ट्रेन काफी हद तक स्लो (धीमी) हो जाती है, तुम एक काम करना; जैसे ही ट्रेन धीमी हो, तुम दौड़ते हुए ट्रेन से उतरना और आगे की तरफ बिना रुके दौड़ते हुए कुछ दूर जाना। जिस तरफ ट्रेन जा रही है, उसी तरफ दौड़ना तो तुम गिरोगे नहीं।"
इस बात से मैं संतुष्ट हो गया।
मुरादाबाद आने से पहले ही यात्रियों ने मुझे गेट पर खड़ा कर दिया। मुरादाबाद आते ही मैं उनके बताए तरीके के मुताबिक प्लेटफॉर्म पर कूदा 🦘 और कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से दौड़ गया... 🏃🏃🏃
इतना तेज़ दौड़ा कि अगले डिब्बे तक जा पहुँचा... 🚃🚃🚃
उस डिब्बे के यात्रियों ने जब मुझे ट्रेन के साथ भागते देखा, तो झट से एक ने मेरा हाथ पकड़ा और दूसरे ने शर्ट पकड़ी और मुझे खींचकर वापस ट्रेन में चढ़ा लिया! 😭😡😢
अब ट्रेन रफ़्तार पकड़ चुकी थी और सब यात्री बोल रहे थे, "तेरा नसीब अच्छा है जो तुझे यह गाड़ी मिल गई, वरना यह सुपरफास्ट ट्रेन है और मुरादाबाद में नहीं रुकती!!" 😝😆