यह दारुल उलूम देवबंद में अरबी दोम (द्वितीय वर्ष) के अशरफ़ उल...
Ummah Post
13 October, 2024

यह दारुल उलूम देवबंद में अरबी दोम (द्वितीय वर्ष) के अशरफ़ उल आलम नाम के एक छात्र के हाथ का हुनर है। उसने इतनी बारीकी से मस्जिद-ए-रशीद की हाथ से चित्रकारी (स्केच) की है कि ऐसा लगता है मानो यह तस्वीर कैमरे से ली गई हो। कमाल की बात यह है कि इसे फ़्रेम करवाकर दारुल उलूम के पुस्तकालय (लाइब्रेरी) में लगा दिया गया है।

कुछ लोगों को अल्लाह बचपन से ही इतना ज़हीन (बुद्धिमान) बनाता है और उनसे ऐसा काम लेता है कि लोगों की अक़्ल दंग रह जाती है।

अल्लाह सुब्हानहू व तआला इस छात्र को दोनों जहान में कामयाब करे!

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शेख अबू हाज़िम की हक़-गोई और सुलेमान बिन अब्दुल मलिक का रो पड़ना
लेख

शेख अबू हाज़िम की हक़-गोई और सुलेमान बिन अब्दुल मलिक का रो पड़ना

सुलेमान बिन अब्दुल मलिक, जो बनू उमय्या का बादशाह था, ने एक मर्तबा शैख़-उल-हदीस अबू हाज़िम (रहमतुल्लाह अलैह) से दरयाफ़्त (पूछा) किया कि इसकी क्या वजह है कि हम लोग दुनिया को पसंद और आख़िरत को नापसंद करते हैं? आपने बरजस्ता (तुरंत) जवाब दिया, "क्योंकि तुम लोगों ने अपनी दुनिया को आबाद किया और अपनी आख़िरत को...