यह दारुल उलूम देवबंद में अरबी दोम (द्वितीय वर्ष) के अशरफ़ उल आलम नाम के एक छात्र के हाथ का हुनर है। उसने इतनी बारीकी से मस्जिद-ए-रशीद की हाथ से चित्रकारी (स्केच) की है कि ऐसा लगता है मानो यह तस्वीर कैमरे से ली गई हो। कमाल की बात यह है कि इसे फ़्रेम करवाकर दारुल उलूम के पुस्तकालय (लाइब्रेरी) में लगा दिया गया है।
कुछ लोगों को अल्लाह बचपन से ही इतना ज़हीन (बुद्धिमान) बनाता है और उनसे ऐसा काम लेता है कि लोगों की अक़्ल दंग रह जाती है।
अल्लाह सुब्हानहू व तआला इस छात्र को दोनों जहान में कामयाब करे!