बहर-ए-ग़फ़्लत यह तेरी हस्ती नहीं,
देख जन्नत इस क़दर सस्ती न...
Ummah Post
By Mohd
3 December, 2020

बहर-ए-ग़फ़्लत यह तेरी हस्ती नहीं,

देख जन्नत इस क़दर सस्ती नहीं।

रहगुज़र दुनिया है यह बस्ती नहीं,

जाये-ऐश-ओ-इशरत-ओ-मस्ती नहीं।

इक दिन मरना है आख़िर मौत है,

करले जो करना है आख़िर मौत है।

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सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान
लेख

सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान

नाम भी मुज़फ़्फ़र था और रहते भी मुज़फ़्फ़रनगर में थे... पूरा नाम था "नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान"। मुज़फ़्फ़रनगर हिंदुस्तान में एक ज़िला है, उन भले दिनों में यह नवाब साहब की जागीर थी। नवाब साहब को इमारतें बनवाने (تعمیرات) का शौक़ था। इसी शौक़ को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने एक बहुत बड़े बाग़ के बीचों...