*अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा के लोग) अपनी जानें खो रहे हैं और हम;*
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Ummah Post
15 October, 2024

*अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा के लोग) अपनी जानें खो रहे हैं और हम;*

*हमने "अहसास" खोया है, अपने "ज़मीर" (अंतरात्मा) खोए हैं, "उम्मत का तसव्वुर" (अवधारणा) खोया है, "इंसानियत" खोई है!*

*हमारा नुक़सान अहल-ए-ग़ज़ा व फ़िलिस्तीन से कई गुना ज़्यादा है।*

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एक माँ द्वारा हलाल और हराम का ख़ूबसूरत सबक़
लेख

एक माँ द्वारा हलाल और हराम का ख़ूबसूरत सबक़

यह कहानी डॉक्टर मोहम्मद रातिब अल-नाबुलसी की है जो वह अपनी माँ के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि एक दिन जब वह छोटे थे, उनकी माँ ने उनसे पूछा: "क्या तुम शब्द 'हलाल' कह सकते हो बिना अपने होठों को बंद किए?" उन्होंने कोशिश की और कामयाबी के साथ शब्द 'हलाल' कह लिया बिना अपने होठों को बंद किए।...