हज़रत शेख-उल-हदीस मौलाना सरफ़राज़ सफ़दर (रहमतुल्लाह अलैहि) ने अपने एक बयान में फ़रमाया:
"क़ुरआन करीम में एक चींटी का ज़िक्र है, जिसने हज़रत सुलेमान (अलैहिस सलाम) के लश्कर को आता देखकर अपनी दूसरी चींटी साथियों से कहा था कि: 'वह अपने बिलों में घुस जाएँ, ताकि हज़रत सुलेमान का लश्कर बेख़बरी में उन्हें पैरों तले कुचल न डाले।'
इसका मतलब यह है कि अपने साथियों और क़ौम की सुरक्षा का होश (शऊर) अल्लाह तआला ने चींटियों को भी अता फ़रमाया है। इसलिए हमें सिर्फ़ अपने ही हाल में मस्त नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश और क़ौम (मुल्क व मिल्लत) के तहफ़्फ़ुज़ (सुरक्षा) और तरक़्क़ी की फ़िक्र भी करनी चाहिए।"
मनक़ूल (नक़ल किया गया)