खामोशी अख्तियार कर लें मगर गिला मत करें। गोशा-नशीं (एकांत मे...
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खामोशी अख्तियार कर लें मगर गिला मत करें। गोशा-नशीं (एकांत में) हो जाएं मगर अपना मियार (स्तर) मत गिराएं। इज्जत न मिले तो किनाराकशी (दूरी) कर लें। वक्त की भीख न मांगें; इज्जत और मोहब्बत के बगैर किसी रिश्ते का वजूद नहीं। इज्जत वह नहीं जो बातों से सुनाई जाती है; इज्जत वह है जो अमल (व्यवहार) में दिखाई देती है।

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कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)
लेख

कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)

एक पिता ने अपने जीवन के आखिरी वक्त में अपने बेटे को पास बुलाया, उसे एक पुरानी कलाई घड़ी सौंपी और कहा: "मेरे बेटे, यह घड़ी दो सौ साल से भी ज़्यादा पुरानी है। यह तुम्हारे परदादा की है। इसे तुम्हें सौंपने से पहले, मैं चाहता हूँ कि तुम इसे गली के मोड़ पर मौजूद घड़ीसाज़ (घड़ी ठीक करने वाले) के पास ले जाओ...