*✍️ हम किस कदर अजीब लोग हैं!
मोहब्बत हम निभा नहीं सकते, नफ़...
Ummah Post
25 October, 2024

*✍️ हम किस कदर अजीब लोग हैं!

मोहब्बत हम निभा नहीं सकते, नफ़रत हम सह नहीं सकते। एहसास (सहानुभूति) हम में ज़िंदा नहीं रहा, एहतराम (सम्मान) हम में बाक़ी नहीं है। मेल-जोल से हम दूर भागते हैं, और हसद (ईर्ष्या) हम में भरी हुई है। ग़लती हमें स्वीकार नहीं करनी, और माफ़ी मांगना हमें तौहीन (अपमान) लगता है। इबादत की हमें ख़बर नहीं है, और मौत हमें याद नहीं है.....!"*

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इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शौक़ और शब-बेदारी / इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शऊर
लेख

इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शौक़ और शब-बेदारी / इमाम मोहम्मद (रह.) का इल्मी शऊर

इमाम मोहम्मद (रह.) के नाम से कौन नावाक़िफ़ (अपरिचित) है, इन्हीं की किताबों ने हनफ़ी फ़िक़्ह को मुदव्वन (मूर्तरूप/कोडीफाइड) किया, मसलों के दलायल (प्रमाण) जमा किए, इख़्तेलाफ़ी अक़्वाल (मतभेदों) का ज़िक्र किया और दुनिया के अक्सर (अधिकांश) ख़ित्तों (क्षेत्रों) में रायज (प्रचलित) फ़िक़्ह-ए-हनफ़ी को तस्नी...