*✍️ हम किस कदर अजीब लोग हैं!
मोहब्बत हम निभा नहीं सकते, नफ़रत हम सह नहीं सकते। एहसास (सहानुभूति) हम में ज़िंदा नहीं रहा, एहतराम (सम्मान) हम में बाक़ी नहीं है। मेल-जोल से हम दूर भागते हैं, और हसद (ईर्ष्या) हम में भरी हुई है। ग़लती हमें स्वीकार नहीं करनी, और माफ़ी मांगना हमें तौहीन (अपमान) लगता है। इबादत की हमें ख़बर नहीं है, और मौत हमें याद नहीं है.....!"*