ज़रा सोचें और ज़रूर सोचें!!💔 आख़िर मरना है💔 यह दुनिया की ज...
Ummah Post
5 November, 2024

ज़रा सोचें और ज़रूर सोचें!!💔 आख़िर मरना है💔 यह दुनिया की ज़िंदगी एक धोखा है, एक खेल-तमाशा है💔 अनक़रीब (जल्द ही) सब कुछ मिट्टी में मिल जाना है..💔 फिर यह तकब्बुर (अहंकार) कैसा, ग़ुरूर कैसा?..💔 यह नफ़रतें किस काम की?💔 यह ओहदे (पद), यह माल व दौलत, दुनियावी शोहरत, यह सब कुछ यहीं रह जाएगा। अल्लाह जानता है कि कफ़न भी नसीब होगा या नहीं? ताक़त का ग़लत इस्तेमाल न करें, ग़ुरूर व तकब्बुर से बचें क्योंकि वक़्त पूछ कर नहीं आता; उरूज (ऊंचाई) के बाद ज़वाल (गिरावट) आकर ही रहता है।💔 एक हक़ीक़त। 👇👇💔 "कुल-लु नफ़्सिन ज़ाएक़तुल मौत", 🥀💔 हर जानदार को मौत का मज़ा चखना है, और हम अच्छे और बुरे हालात में डाल कर तुम सबकी आज़माइश (परीक्षा) कर रहे हैं, आख़िरकार तुम्हें हमारी ही तरफ पलट कर आना है।💔 इब्लीस (शैतान) भी तकब्बुर और ग़ुरूर की वजह से अर्स (आसमान) से फ़र्श (ज़मीन) पर आ गिरा।💔 कोशिश करें ऐसी बीमारियों से खुद को रोकें, अपनी आख़िरत बर्बाद न होने दें। रब-ए-करीम महफ़ूज़ फ़रमाए—तकब्बुर, अना (अहं), ग़ुरूर और ग़ुस्से से। ❤️‍🩹

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परहेज़गार उस्ताद और समझदार शागिर्द
लेख

परहेज़गार उस्ताद और समझदार शागिर्द

हज़रत हकीमुल उम्मत थानवी और हज़रत शाह वसीउल्लाह इलाहाबादी (नूरुल्लाह मरक़दहुमा) दोनों ने यह वाक़िया नक़्ल किया कि एक परहेज़गार आलिम बच्चों को पढ़ाते थे। एक दिन उनके घर में फ़क्र व फ़ाक़ा (ग़रीबी और भुखमरी) था, भूख की शिद्दत (तीव्रता) से उनका चेहरा मुरझाया हुआ था। जो तलबा (छात्र) पढ़ने आते थे, उनमें...