ज़रा सोचें और ज़रूर सोचें!!💔 आख़िर मरना है💔 यह दुनिया की ज़िंदगी एक धोखा है, एक खेल-तमाशा है💔 अनक़रीब (जल्द ही) सब कुछ मिट्टी में मिल जाना है..💔 फिर यह तकब्बुर (अहंकार) कैसा, ग़ुरूर कैसा?..💔 यह नफ़रतें किस काम की?💔 यह ओहदे (पद), यह माल व दौलत, दुनियावी शोहरत, यह सब कुछ यहीं रह जाएगा। अल्लाह जानता है कि कफ़न भी नसीब होगा या नहीं? ताक़त का ग़लत इस्तेमाल न करें, ग़ुरूर व तकब्बुर से बचें क्योंकि वक़्त पूछ कर नहीं आता; उरूज (ऊंचाई) के बाद ज़वाल (गिरावट) आकर ही रहता है।💔 एक हक़ीक़त। 👇👇💔 "कुल-लु नफ़्सिन ज़ाएक़तुल मौत", 🥀💔 हर जानदार को मौत का मज़ा चखना है, और हम अच्छे और बुरे हालात में डाल कर तुम सबकी आज़माइश (परीक्षा) कर रहे हैं, आख़िरकार तुम्हें हमारी ही तरफ पलट कर आना है।💔 इब्लीस (शैतान) भी तकब्बुर और ग़ुरूर की वजह से अर्स (आसमान) से फ़र्श (ज़मीन) पर आ गिरा।💔 कोशिश करें ऐसी बीमारियों से खुद को रोकें, अपनी आख़िरत बर्बाद न होने दें। रब-ए-करीम महफ़ूज़ फ़रमाए—तकब्बुर, अना (अहं), ग़ुरूर और ग़ुस्से से। ❤️🩹
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