इतिहास गवाह है कि वह समंदर था, जिसने डुबोया नहीं (हज़रत मूसा अ.)।
वह आग थी, जिसने जलाया नहीं (हज़रत इब्राहिम अ.)।
वह पहाड़ था, जिसकी बुलंदी ने बचाया नहीं (हज़रत नूह अ. का बेटा)।
वह मछली थी, जो हज़म न कर सकी (हज़रत यूनुस अ.)।
वह बच्चा था, जो बोल पड़ा।_
सोते हुए लोग, तीन सौ साल बाद उठ गए (अहले कहफ़)।
चाँद के टुकड़े हो गए (मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)।
यह मत कहो कि यह हो नहीं सकता, बल्कि बोलो कि: "ऐ मेरे रब!! मेरे लिए आसानी फ़रमा।"
ऐ अल्लाह! मेरे लिए मेरा काम आसान कर दे और मेरी मदद फ़रमा...!! आमीन