कुछ राहों पर आपको तन्हा (अकेले) ही चलना पड़ता है, वहाँ न तो...
Ummah Post
5 November, 2024

कुछ राहों पर आपको तन्हा (अकेले) ही चलना पड़ता है, वहाँ न तो दोस्त आपका साथ दे सकते हैं, न ही अहल-ए-खाना (परिवार वाले), यहाँ तक कि शरीक-ए-हयात (जीवनसाथी) भी नहीं। वहाँ आप और सिर्फ आप होते हैं।

Share this article
शेख अबू हाज़िम की हक़-गोई और सुलेमान बिन अब्दुल मलिक का रो पड़ना
लेख

शेख अबू हाज़िम की हक़-गोई और सुलेमान बिन अब्दुल मलिक का रो पड़ना

सुलेमान बिन अब्दुल मलिक, जो बनू उमय्या का बादशाह था, ने एक मर्तबा शैख़-उल-हदीस अबू हाज़िम (रहमतुल्लाह अलैह) से दरयाफ़्त (पूछा) किया कि इसकी क्या वजह है कि हम लोग दुनिया को पसंद और आख़िरत को नापसंद करते हैं? आपने बरजस्ता (तुरंत) जवाब दिया, "क्योंकि तुम लोगों ने अपनी दुनिया को आबाद किया और अपनी आख़िरत को...