अपने आप से दोस्ती निभाएं। 

अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतर...
Ummah Post
6 November, 2024

अपने आप से दोस्ती निभाएं।

अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतरिक संघर्ष) के शिकार हैं, तो आपकी ज़िंदगी बाहर से कैसे सामंजस्यपूर्ण (हम-आहंग) होगी?

दूसरों के साथ हमारे टकराव असल में उन्हीं हंगामों का अक्स (प्रतिबिंब) हैं जो हमारे अंदर पनप रहे होते हैं।

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इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)
लेख

इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)

बिस्मिल्लाह; रब्बी यस्सिर व अ'इन! (अल्लाह के नाम से; ऐ मेरे रब, आसानी फ़रमा और मदद कर!) नोट: इस मंशूर (घोषणापत्र) के मुखातिब (संबोधित लोग) सिर्फ उलूमे शरीयत (इस्लामी शास्त्र के ज्ञान) के तलबा (विद्यार्थी) हैं। इल्मे शरई (धार्मिक ज्ञान) को अल्लाह तआला ने 'कौले थक़ील' (एक भारी बात) क़रार दिया है। य...