हज़रत सख़्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) बहुत बड़े व्यापारी थे और चूं...
Ummah Post
6 November, 2024

हज़रत सख़्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) बहुत बड़े व्यापारी थे और चूंकि रसूलुल्लाह ﷺ ने दुआ फ़रमाई थी:

اللَّهُمَّ بَارِكْ لِأُمَّتِي فِي بُكُورِهَا

"ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत को सुबह सवेरे के वक़्त में बरकत दे।"

इसलिए वह हमेशा अपने व्यापार का सामान सुबह सवेरे रवाना फ़रमाते थे और मुनासिब मुनाफ़ा (लाभ) कमाते थे।

(अबू दाऊद, किताब अल-जिहाद, बाब फ़ी अल-इब्तिकार फ़ी अस्-सफ़र)

Share this article
बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही
लेख

बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा, "बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे शौहर (पति) ने तुम्हें क्या तोहफ़ा दिया???" सहेली ने कहा, "कुछ भी नहीं!!!!" उसने सवाल करते हुए पूछा, "क्या यह अच्छी बात है??? क्या उनकी नज़र में तुम्हारी कोई क़ीमत नहीं???" लफ़्ज़ों (शब्दों) का यह ज़हरीला बम गिराकर वह सहे...