कष्ट देने वाली चीज़ को क्यों देखें:
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Ummah Post
6 November, 2024

कष्ट देने वाली चीज़ को क्यों देखें:

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हज़रत ग़ज़वान (रहमतुल्लाही अलैहि) किसी जंग में शरीक थे, उनके सामने एक लड़की आ गई। आपने उसको देख लिया, फिर अपना हाथ उठाकर अपनी आंख को एक चपत (थप्पड़/चांटा) लगाई कि वह लड़की (भी खौफ के मारे) भाग गई और उन्होंने अपनी आंख को मुखातिब करके फरमाया:

(कि खबरदार!) तू उस चीज़ को देखती है जो तुझे (आख़िरत में) मुसीबत में डाल देगी।

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किताब: इश्क़-ए-मजाज़ी की तबाह कारियाँ (छद्म/सांसारिक प्रेम की तबाही)

(सफ़हा नंबर 107)

मुसन्निफ़ (लेखक): इमाम इब्न अल-जौज़ी (रह.)

तरजुमा (अनुवाद): मौलाना मुफ़्ती इमदादुल्लाह अनवर साहब

नाक़िल (नक़ल करने वाला): अनस मेमन पालनपुरी

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50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक
लेख

50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक

एक बिजली के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर मैं करीब चला गया और उस पर लिखी तहरीर (लिखावट) पढ़ने लगा। लिखा था.........! "बराय-ए-करम (कृपया) ज़रूर पढ़ें। इस रास्ते पर कल मेरा 50 रुपये का नोट खो गया है, मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले, बराय-ए-करम पहुँचा दे, नवाज़िश (कृपा) होगी.................