*कमाल के अशआर और उनका तर्जुमा*

ﻭَﺇﻥْ ﺿَﺎﻗَﺖْ ﺑِﻚَ ﺍﻷﺣْﻮَﺍ...
Ummah Post
6 November, 2024

*कमाल के अशआर और उनका तर्जुमा*

ﻭَﺇﻥْ ﺿَﺎﻗَﺖْ ﺑِﻚَ ﺍﻷﺣْﻮَﺍﻝُ ﻳَﻮْﻣﺎً

فبِالأﺳْﺤَﺎﺭِ ﺻَﻞِّ ﻋَﻠَﻰ ﻣُﺤَﻤَّﺪ

*जब भी किसी दिन तुम पर सख्त हालात आ जाएं तो रात के आखिरी पहर में मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर दरूद भेजने का एहतमाम करो।*

ﻭ ﻻ ﺗَﺘْﺮُﻙْ ﺭَﺳُﻮﻝَ ﺍﻟﻠﻪِ ﻳَﻮْﻣﺎً

ﻓَﻤَﺎ ﺃﺣْﻠَﻰ ﺍﻟﺼَّﻼﺓُ ﻋَﻠَﻰ ﻣُﺤَﻤَّﺪ

*देखो! आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर दरूद भेजना इस कदर मिठास भरी इबादत है कि कोई भी दिन नबी करीम ﷺ पर दरूद पढ़े बिना न जाने दें।*

ﺷِﻔَﺎﺀٌ ﻟِﻠﻘُﻠُﻮﺏِ ﻟَﻬَﺎ ﺿِﻴَﺎﺀٌ

ﻭَﻧُﻮﺭٌ ﻣُﺴْﺘَﻤَﺪٌ ﻣِﻦْ ﻣُﺤَﻤَّﺪ

*आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर दरूद भेजने से नूर, रोशनी और दिलों को शिफा (स्वास्थ्य/चंगाई) हासिल होती है।*

ﺑِﻬَﺎ ﻳُﺴْﺮٌ ﻭﺗَﻔْﺮِﻳﺞٌ ﻟِﻜَﺮْﺏٍ

ﻟِﻤَﻦ *ﺃﻫْﺪَﻯ ﺍﻟﺼَّﻼﺓَ ﻋَﻠَﻰ ﻣُﺤَﻤَّﺪ

*जो शख्स भी नबी करीम ﷺ पर दरूद भेजता है तो उसकी बरकत से तकलीफें और परेशानियां दूर हो जाती हैं और आसानियां मयस्सर (उपलब्ध) आएंगी, इन्शाअल्लाह।*

ﻭَﺃﻓْﻀَﻠُﻬَﺎ ﺇﺫﺍ ﻣَﺎ ﻛُﻨْﺖَ ﻳَﻮْﻣﺎً

ﺑِﺮَﻭْﺿَﺘِﻪِ تُصلى ﻋَﻠَﻰ ﻣُﺤَﻤَّﺪ

*फिर इस दरूद की फ़ज़ीलत (महत्व) और कद्र-ओ-मंजिलत के क्या ही कहने जब तुम उनके रौज़ा-ए-मुबारका (पवित्र मज़ार) पर हाजिर होकर उन्हें दरूद-ओ-सलामी पेश करोगे।*

ﺗُﺼَﻠِّﻲ ﺑِﺎﺷْﺘِﻴَﺎﻕٍ ﻓﻲ ﻣَﻘَﺎﻡٍ

ﻋَﻈِﻴﻢِ ﺍﻟﺸَﺄﻥِ ﻳَﺴْﻤَﻌُﻬَﺎ ﻣُﺤَﻤَّﺪ

*तुम जिस कदर भी शौक और मोहब्बत से दरूद पढ़ सकते हो ज़रूर पढ़ो कि वहां नबी करीम ﷺ खुद उसे समाअत (श्रवण) फरमाते हैं।*

ﻓَﻴَﺎ ﺳَﻌْﺪ ﺍﻟﺬﻱ ﻗَﺪْ ﺟَﺎﺀَ ﻳَﻮْﻣﺎً

ﻭَﻗَﺪ *ﺃﻫْﺪَﻯ ﺍﻟﺴَّﻼﻡَ ﻋَﻠَﻰ ﻣُﺤَﻤَّﺪ

*क्या ही खुशबख्त (भाग्यशाली) इंसान है वह जिसने पहले उनकी तरफ दरूद का हदिया (उपहार) भेजा हो और फिर एक दिन खुद भी उनकी खिदमत में पहुंच गया हो।*

*ﺗَﻘِﻲٌ ﺑَﻞْ ﺳَﻌِﻴﺪٌ ﻣُﺴْﺘَﺠَﺎﺏٌ*

*ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﺍﻟﺤَﺸْﺮِ ﺷَﺎﻓِﻌُﻪُ ﻣُﺤَﻤَّﺪ*

*ऐसा आदमी मुत्तकी (परहेजगार) है, बल्कि बड़ा खुशबख्त और कबूलियत याफ्ता (स्वीकृत) है कि कयामत के दिन मुहम्मद ﷺ जिसके शफीअ (सिफारिशी) होंगे।*

*सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम*

****************************

Share this article
अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन
लेख

अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन

शायर-ए-मशरिक़ (पूर्व के कवि) अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने सुन्नत-ए-रसूल (पैगंबर की परंपरा) के पालन को अपना शियोवा-ए-हयात (जीवन का तरीका) बना लिया था। "जौहर-ए-इक़बाल" में एक अजीब और बसीरत अफ़रोज़ (ज्ञानवर्धक) घटना का वर्णन किया गया है, जिससे अल्लामा इकबाल के जज़्बा-ए-शौक़ और इतात-ए-रसूल (रसूल के प्रति प्...