मुझे लगता है....
इंसान को अपनी भागती-दौड़ती ज़िंदगी में एक-दो ऐसे लोगों का साथ ज़रूर रखना चाहिए...
जो अचानक उसे सरसरी सा हिला कर पूछ सकें...
"दोस्त...
ईमान के क्या हालात हैं? 💦
नमाज़ों में कोताही (लापरवाही) तो नहीं हो रही?"
और इंसान उन्हें खुल कर बता सके,
"हाँ... हो रही है।" 🥀
और वे
जवाब में थोड़ी सी मोटिवेशन (प्रेरणा) दे दें,
"हिम्मत कर.... जन्नत में साथ नहीं जाना क्या?" 💦
अल्लाह तआला आपको और मुझे ऐसे नेक लोगों का साथ दे। आमीन। ♥️