ऐ दुनिया वालो! जान लो कि तुमको भी एक दिन मरना है। मौत के बाद...
Ummah Post
29 November, 2021

ऐ दुनिया वालो! जान लो कि तुमको भी एक दिन मरना है। मौत के बाद उठना और अपने नेक (अच्छे) व बद (बुरे) अमाल का बदला (जज़ा और सज़ा) पाना है। इसलिए दुनिया के चंद दिनों के जीने पर मत फूलो (घमंड करो) और मौत को कभी न भूलो। दुनिया मुसीबत का घर है; फ़ना (नष्ट) होना इसकी पहचान है और धोखा इसका तरीक़ा है। इसकी हर एक चीज़ का अंजाम ज़वाल (पतन) है और इसका हमेशा किसी के पास रहना मुहाल (असंभव) है। जब आदमी को इसमें थोड़ा सा आराम मिलता है, तो उसके बदले बरसों का रंज (दुख) सामने आता है। मौत हर एक के सिर पर खड़ी है और इसका जायक़ा चखना सब पर लाज़िम (अनिवार्य) है।

ख़ुदा तआला के बंदो! आज तुम्हारा दुनिया में ऐसा हाल है जैसा तुमसे पहले लोगों का था, जो तुमसे उम्र में ज़्यादा, ताक़त में मज़बूत, आबादी में कसीर (अधिक) और मकानों में आलीशान थे। मगर ज़माने के इंक़लाब (बदलाव) से आज उनकी आवाज़ भी नहीं निकलती। उनके जिस्म क़ब्रों में सड़ गए, शहर उजड़ गए और मकान गिर गए। कहाँ वे आलीशान महल, गाऊ-तकिए और मख़मली फ़र्श थे, और कहाँ अब पत्थर, ईंटें, क़ब्र की ख़ाक (धूल) और लहद (क़ब्र) का कोना है। क्या तुम्हें कोई शक है कि जैसा उनका हाल हुआ वैसा तुम्हारा न होगा? क्या वही तन्हाई न होगी और क्या मिट्टी में यह जिस्म कीड़ों की खुराक न बनेगा?

शेर:

सँवरते थे कि इक आलम की आँखें हमको देखेंगी,

ख़बर क्या थी हमारी महफ़िलें मातम को देखेंगी!

सितम है जामा-ए-हस्ती का इस तन से जुदा होना,

लिबास-ए-तंग है उतरेगा आख़िर धज्जियाँ होकर!

जितनी बढ़ती है उतनी घटती है,

ज़िंदगी आप ही आप कटती है।

नज़र ग़ौर से जो दुनिया की हालत देखी,

बरपा हमने हर रोज़ यहाँ की क़यामत देखी।

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अध्ययन का अनोखा लाभ
लेख

अध्ययन का अनोखा लाभ

शेख़ सलमान अल-औदा अपनी किताब "ज़ंज़ाना" में लिखते हैं कि: एक मर्तबा मैंने अपने शेख़ से शिकायत की कि: मैंने एक किताब पढ़ी लेकिन मुझे उसमें से कुछ भी याद नहीं रहा, चुनाँचे उन्होंने मुझे एक खजूर दी और फ़रमाया: लो यह चबाओ! फिर मुझसे पूछा: क्या अब तुम बड़े हो गए? मैंने कहा: नहीं, फ़रमाया: लेकिन यह खजूर...