शादी की पहली रात... और शायर
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क्या बताएँ वस्ल (मिलन) की शब (रात) क्या हुआ,
शायरी का भूत था सर पर चढ़ा!
शेर-गोई (शायरी) हो रही थी एक तरफ़,
और दुल्हन सो रही थी एक तरफ़।
शेर के औज़ान (बह्र/मीटर) में करता था बात,
आगे था उस्ताद से दो-चार हाथ।
यूँ फँसा मिसरा (लाइन) सवेरा हो गया,
दूर नज़रों से अंधेरा हो गया।
उठ के बिस्तर से दुल्हन कहने लगी,
"भाड़ में जाए ये तुम्हारी शायरी!"
"फ़ाइलातुन... फ़ाइलातुन... फ़ाइलात..."
मार के कहने लगी वह मुझको लात!
"रात भर तुम शेर कहते रह गए,
दिल के अरमाँ आँसुओं में बह गए!"