"'वल-लैल' (रात की क़सम) में है मोहम्मद (ﷺ) की ज़ुल्फ़ों का तरन्नुम (मधुरता),
'वश-शम्स' (सूरज की क़सम) में है अहमद (ﷺ) के रुख़सार (चेहरे) का तरन्नुम।
'वल-फ़ज्र' (सुबह की क़सम) में है सुब्ह-ए-रिसालत की बशारत (ख़ुशख़बरी),
'वल-अत्र' (ज़माने की क़सम) में है दौर-ए-नबुव्वत की बशारत।"
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