"अपनी आँखों की हिफ़ाज़त यह सोच कर किया करें!
कि कल बरोज़-ए-महशर (कयामत के दिन) इनसे अपने रब का दीदार करना है।"
*इन शा अल्लाह तआला* ❤️
"अपनी आँखों की हिफ़ाज़त यह सोच कर किया करें!
कि कल बरोज़-ए-महशर (कयामत के दिन) इनसे अपने रब का दीदार करना है।"
*इन शा अल्लाह तआला* ❤️