"ऐ मेरे मौला! अगर तूने मुझे अज़ाब (दंड) देने का फ़ैसला कर ही...
Ummah Post
11 November, 2024

"ऐ मेरे मौला! अगर तूने मुझे अज़ाब (दंड) देने का फ़ैसला कर ही लिया है, तो मेरे मामले को लोगों से छुपा कर रखना, ताकि कोई शख़्स यह न कहता फिरे: 'आज वह भी अज़ाब में मुब्तला (घिरा) है जो ख़ुदा तक रास्ता दिखाया करता था।'"

(इमाम इब्न अल-जौज़ी, सैद अल-ख़ातिर: 305)

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दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी
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दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी

शागिर्द (छात्र) ग़ौर से सुन रहा था। उस्ताद (शिक्षक) ने पूछा, "अगर मैं तुम्हें एक सेब, और एक सेब, और एक सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कितने सेब हो जाएंगे?" शागिर्द ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, "4।" उस्ताद को लगा कि शायद शागिर्द सवाल ठीक से समझ नहीं पाया। उस्ताद ने इत्मीनान से दोबारा पूछा... "देखो...