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दिल का बोझ किसी के सामने हल्का करते-करते, बाज़ दफ़ा (कभी-कभी) हम अपनी जात (वजूद/मर्यादा) को ही दूसरों के सामने हल्का (कमतर) कर देते हैं। परेशानियाँ बताने से कम हो सकती हैं, लेकिन! उसको बताएँ जो इस क़ाबिल हो।
•═༻◉•🌹 उर्दू अदब (साहित्य) 📚•◉༺═•