"दौलत एक झटके में, ख़ूबसूरती एक बीमारी में और इज़्ज़त एक ग़लती से फ़ना (नष्ट) हो जाती है। अल्लाह तआला हमें ग़ुरूर व तकब्बुर (घमंड) से बचाए और अक़्ल-ए-सलीम (सही समझ/बुद्धि) अता फ़रमाए।"
*आमीन*
"दौलत एक झटके में, ख़ूबसूरती एक बीमारी में और इज़्ज़त एक ग़लती से फ़ना (नष्ट) हो जाती है। अल्लाह तआला हमें ग़ुरूर व तकब्बुर (घमंड) से बचाए और अक़्ल-ए-सलीम (सही समझ/बुद्धि) अता फ़रमाए।"
*आमीन*