कहते हैं कि शेख अहमद यासीन (रहिमहल्लाह) से पूछा गया कि:
🔻 "क्या प्रतिरोध (مقابلہ/مزاحمت) की शक्ति न होने की स्थिति में दुश्मन के साथ संबंधों को सामान्य बनाना (Normalize करना) जायज़ है?"
शेख ने जवाब देते हुए कहा:
🔻 "नहीं ~ क्योंकि जो शादी नहीं कर सकता, उसे ज़िना (व्यभिचार) की इजाज़त नहीं है।"