:) क्या सादा ज़माना था कि एक ब्रैकेट और दो बिंदु : ) लगाकर म...
Ummah Post
14 November, 2024

:) क्या सादा ज़माना था कि एक ब्रैकेट और दो बिंदु : ) लगाकर मुस्कुरा लेते थे,

अब तो इमोजीस ने ऐसी मुसीबत डाल दी है कि मुस्कुराना भी पंद्रह किस्म का हो गया है।

🤓😄😁😆😂😅🤣🙃🙂☺️😊😍🤩🥰🙃

और हालात की सितम-ज़रीफ़ी (विडंबना) देखें कि शर्माने का इज़हार करने के लिए सिर्फ

🙈🙈🙈 "बंदर" उपलब्ध है। 😂

*🤓🤓 अनोखी मुस्कुराहट 🤓🤓*

Share this article
गिलास मत बने रहो बल्कि झील बन जाओ
लेख

गिलास मत बने रहो बल्कि झील बन जाओ

एक नौजवान अपनी ज़िंदगी के मामलात से काफ़ी परेशान था। एक रोज़ एक दरवेश से मुलाक़ात हो गई तो अपना हाल कह सुनाया। कहने लगा कि बहुत परेशान हूँ। यह दुख और परेशानियाँ अब मेरी बर्दाश्त से बाहर हैं। लगता है शायद मेरी मौत ही मुझे इन ग़मों से निजात दिला सकती है। दरवेश ने उसकी बात सुनी और कहा, "जाओ और नमक ल...