काश! जिन्हें हम चाहते हैं वो हमेशा हमारे साथ रहें, या फिर जब...
Ummah Post
15 November, 2024

काश! जिन्हें हम चाहते हैं वो हमेशा हमारे साथ रहें, या फिर जब वो रुख़सत (विदा) हों तो हम भी उनके साथ रुख़सत हो जाएं।

कितनी रातें गुज़रीं और उनकी यादें मेरे साथ रहीं, दिल ग़मगीन (उदासीन) है, और आँखें नम हैं।

जब भी मैं उन लोगों की सरज़मीन (धरती) पर पहुँचा जिनसे मोहब्बत की, पहले आँखों से अश्क (आँसू) बहते हैं, फिर जिस्म पर कतरे (बूंदें) गिरते हैं।

😔💔

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हम तो सुनार थे, लोगों ने हमें लोहार समझ लिया
लेख

हम तो सुनार थे, लोगों ने हमें लोहार समझ लिया

एक बार मैं शेख हज़रत मौलाना मसीहउल्लाह ख़ान साहब रहमतुल्लाह अलैह के पास बैठा हुआ था और उस समय वहां और कोई नहीं था, केवल मैं था। इसी बीच एक आदमी आया और हज़रत से तावीज़ मांगने लगा। हज़रत ने कहा कि मैं तावीज़ नहीं दिया करता। जाओ भाई जान से ले लो! (भाई जान से मुराद हज़रत के साहबज़ादे हैं, जिन्हें छात्र...