अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम ..

शाह-ए-ज़ीशान को, शान-ए-क़ुरआ...
Ummah Post
15 November, 2024

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम ..

शाह-ए-ज़ीशान को, शान-ए-क़ुरआन को,

जुज़्व-ए-ईमान को, रब के मेहमान को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

हक़ के दिलदार को, शाह-ए-अबरार को,

मेरे सरकार को, सब के ग़मख़्वार को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

उनके अतवार (तरीक़ों) को, आला किरदार को,

नर्म गुफ़्तार (बोली) को, तेज़ रफ़्तार को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

सब्ज़ दस्तार (पगड़ी) को, उनके रुख़सार (गालों) को,

हुस्न-ए-मह-यार को, ज़ुल्फ़-ए-ख़मदार (घुंघराले बालों) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

आमिना माई को, आपकी दाई (हलीमा) को,

बूढ़ी हमसाई (पड़ोसन) को, हर शनासाई (परिचित) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

मां की ममताओ को, जन्नती पाँवों को,

प्यार की छाँवों को, उम्मती माताओं को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

इश्क़ के फ़ख़्र को, इल्म के क़स्र (महल) को,

पैकर-ए-सब्र को, बिन्त-ए-बू बक्र (आएशा) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

नाज़ बरदार को, उनके ग़मख़्वार को,

चार के चार को, यानी हर यार (चारों ख़लीफ़ाओं) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

उनके दिलदार को, आशिक़-ए-ज़ार को,

ज़ानू-ए-यार (यार के घुटने) को, यार-ए-ग़ार (अबू बक्र) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

अद्ल (इंसाफ़) की आब को, जोश की ताब को,

गौहर-ए-नायाब को, इब्न-ए-ख़त्ताब (उमर) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

माल को, जान को, दस्त-ए-फ़ैज़ान (दानवीर हाथों) को,

इब्न-ए-अफ़्फ़ान को, हज़रत उस्मान को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

तेज़ तलवार को, फ़तह के बरदार (ध्वजवाहक) को,

अज़्म-ए-कर्रार को, उनके घर-बार (अहले-बैत) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

फ़िक्र व एहसास को, उनके अलमास (हीरे) को,

इल्म की प्यास को, इब्न-ए-अब्बास को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

उनके जाँबाज़ को, एक दमसाज़ (सच्चे साथी) को,

हब्शी अंदाज़ को, उजली आवाज़ (हज़रत बिलाल) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

एक सुख़न दान (शायर) को, एक थना ख़्वान (प्रशंसक) को,

नाअत की शान को, यानी हस्सान (बिन साबित) को,

अस्सलाम, अस्सलाम, अस्सलाम।

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लेख

पैदल चलते हुए मुताला (अध्ययन)

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