क्या फ़र्क पड़ता है कि हमारे पास कितना हुस्न (खूबसूरती), कित...
Ummah Post
16 November, 2024

क्या फ़र्क पड़ता है कि हमारे पास कितना हुस्न (खूबसूरती), कितनी दौलत, कितने लाख, कितने करोड़, कितने घर, कितनी गाड़ियाँ हैं, खानी तो बस दो रोटियाँ हैं, जीनी तो बस एक ज़िंदगी है।

फ़र्क तो बस यह पड़ता है कि हमने कितने पल ख़ुशी से बिताए और कितने लोग हमारी वजह से ख़ुशी से जिए।🥹

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ईमान कितनी बड़ी नेमत है
लेख

ईमान कितनी बड़ी नेमत है

हज़रत मौलाना पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी ने एक वाक़या सुनाया कि 1994 में जब समरक़ंद जाने का मौक़ा मिला, तो जामिया मस्जिद समरक़ंद में जुमा का ख़ुत्बा दिया। जुमा की नमाज़ के बाद कुछ नौजवान मेरे पास आए और कहने लगे, "हज़रत! आप हमारे घर तशरीफ़ ले चलें, हमारी वालिदा (माता जी) आपसे मिलना चाहती हैं।" मैं...