क्या फ़र्क पड़ता है कि हमारे पास कितना हुस्न (खूबसूरती), कितनी दौलत, कितने लाख, कितने करोड़, कितने घर, कितनी गाड़ियाँ हैं, खानी तो बस दो रोटियाँ हैं, जीनी तो बस एक ज़िंदगी है।
फ़र्क तो बस यह पड़ता है कि हमने कितने पल ख़ुशी से बिताए और कितने लोग हमारी वजह से ख़ुशी से जिए।🥹