इफ़ादात: हकीमुल उम्मत
छात्र (शागिर्द) की हौसला अफ़ज़ाई और मोहब्बत बढ़ाने के उसूल: इस्लामी शिक्षाओं के प्रकाश में
हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि मैंने जनाब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फ़रमाते हुए सुना कि, "ख़्वाब (सपने) में मुझे दूध का एक प्याला दिया गया और मैंने ख़ूब जी भरकर पिया। फिर बचा हुआ दूध उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) को दे दिया।" लोगों ने अर्ज़ किया, "हुज़ूर! इसकी ताबीर (अर्थ) क्या हुई?" फ़रमाया, "दूध से मुराद (अर्थ) इल्म (ज्ञान) है।" (बुख़ारी)
इससे दो बातें मालूम हुईं:
पहला यह कि उस्ताद (शिक्षक) को कभी-कभी अपने खाने-पीने में शागिर्द को भी शरीक (शामिल) कर लेना चाहिए, जिससे उसका दिल बढ़ता है और मोहब्बत ज़्यादा होती है; और उस्ताद से जितनी ज़्यादा मोहब्बत होगी, इल्म में उतनी ही बरकत होगी।
दूसरा यह कि अगर हक़ तआला (अल्लाह) किसी को कोई बातिनी (आध्यात्मिक) बरकत अता फ़रमाए, तो उसे शागिर्द को देने से परहेज़ (संकोच) नहीं करना चाहिए।
(इस्लाह-ए-इंक़िलाब)