रहमदिल (दयालु) इंसान वह होता है जो दूसरों के दुख-दर्द को महसूस करता है और उनकी मदद के लिए हर मुमकिन कोशिश करता है। हज़रत उमर (रज़िअल्लाहु अन्हु) का जीवन इसकी सबसे बेहतरीन मिसाल है। एक दिन रात के समय गश्त (चक्कर) के दौरान, उन्होंने एक झोंपड़ी में बच्चों के रोने की आवाज़ सुनी। करीब जाकर देखा तो एक औरत हांडी में पानी उबाल रही थी ताकि बच्चे यह समझें कि खाना पक रहा है और सो जाएं। हज़रत उमर (रज़िअल्लाहु अन्हु) फौरन बैतुल-माल (सरकारी खज़ाना) गए, खाने का सामान खुद अपने कंधों पर उठाया और उस औरत तक पहुंचाया।
यह वाकया (घटना) हमें सिखाता है कि रहमदिल इंसान सिर्फ बातों से नहीं बल्कि अपने अमल (काम) से अपनी इंसानियत का सबूत देता है। रहमदिली इंसानियत का सबसे खूबसूरत पहलू है, जो समाज को सुकून और मोहब्बत से भर देता है।