"बेशक दिल मुर्दा भी हो जाते हैं, और ज़िंदा भी; जब यह मुर्दा...
Ummah Post
17 November, 2024

"बेशक दिल मुर्दा भी हो जाते हैं, और ज़िंदा भी; जब यह मुर्दा हो जाएं, तो उनको फ़राएज़ (अनिवार्य इबादत) अदा करने पर लगाओ;

फिर जब यह ज़िंदा हो जाएं, तो दिल को नफ़्ली आमाल (स्वैच्छिक इबादत) पर राग़िब करो (प्रेरित करो)!"

इमाम हसन बसरी रहिमहुल्लाह

(अज़-ज़ुह्द लिल-इमाम अहमद : 216/1)

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