गाने = गुनाह हैं
गाने = ग़म बढ़ाते हैं
गाने = तंगी बढ़ाते हैं
गाने = बहुत परेशान करने वाले हैं
गाने = क़ुरआन सुनने से नफ़रत पैदा करते हैं
गाने = क़ुरआन को दिल पर भारी बनाते हैं
गाने = इबादात को मुश्किल बनाते हैं
गाने = बुरे लगते हैं
गाने = दिल को दुखी करते हैं
गाने = दिल को मुर्दा करते हैं
गाने = अफ़सुर्दगी (उदासी) पैदा करते हैं
*"लेकिन क़ुरआन इन सब के बरअक्स (विपरीत) है, यह दिल को सुकून देता है, दिल को आराम पहुंचाता है और दिल की तकलीफ़ दूर करता है।"*