एक चिड़िया और चिड़ा शाख (टहनी) पर बैठे थे।
दूर से एक इंसान...
Ummah Post
17 November, 2024

एक चिड़िया और चिड़ा शाख (टहनी) पर बैठे थे।

दूर से एक इंसान आता दिखाई दिया।

चिड़िया ने चिड़े से कहा कि उड़ जाते हैं, यह हमें मार देगा।

चिड़ा कहने लगा, "अरी भली मानस, ज़रा इसकी दस्तार (पगड़ी) और पहनावा तो देखो! शक्ल से शराफ़त टपक रही है, यह हमें क्यों मारेगा?"

जब वह करीब पहुँचा, तो उसने तीर-कमान निकाली और चिड़े को मार दिया।

चिड़िया फ़रियाद लेकर वक्त के बादशाह के पास हाज़िर हो गई। शिकारी को तलब किया गया। शिकारी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

बादशाह ने चिड़िया को सज़ा का अख्तियार (अधिकार) दिया कि जो चाहे सज़ा दे।

चिड़िया ने कहा कि इसको बोल दिया जाए कि!!

अगर यह शिकारी है, तो लिबास (कपड़े) शिकारियों वाला पहने।

शराफ़त का लबादा उतार दे।

*सबक*

किसी की ज़ाहिरी हालत और लिबास से उसकी असलियत का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए। ज़ाहिरी शराफ़त या इज़्ज़तदार लिबास धोखा दे सकता है, और इंसान के बातिन (मन) या नीयत को समझना ज़रूरी है।

इसलिए, इंसानों को उनके आमाल (कर्मों), किरदार और नीयत के मुताबिक परखना चाहिए, न कि उनकी ज़ाहिरी हालत या लिबास से। धोखे और फ़रेब से बचने के लिए सावधान रहना ज़रूरी है।

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