फरमाया (मौलाना अशरफ अली थानवी, रहमतुल्लाह अलैह ने): अब तो बस...
Ummah Post
25 December, 2023

फरमाया (मौलाना अशरफ अली थानवी, रहमतुल्लाह अलैह ने): अब तो बस मुसलमानों को चाहिए कि सब लग-लिपटकर अल्लाह तआला से दुआ करें, मगर अफ़सोस है कि मुसलमानों का यह अक़ीदा (विश्वास) हो गया है कि अल्लाह मियां दुआ क़बूल नहीं करते और यह महज़ ख़िलाफ़-ए-वाक़िया (तथ्यों के विपरीत) है। मुसलमानों की दुआ तो दरकिनार, अल्लाह तआला ने तो शैतान की दुआ को भी रद नहीं फ़रमाया, मँज़ूर फ़रमाई और ऐसी हालत में जब कि वह मरदूद (दुत्कारकर निकाला) किया जा रहा था। चुनाँचे इर्शाद है: قَالَ رَبِّ فَأَنظِرۡنِيٓ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ (३६) قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلۡمُنظَرِينَ (३७) إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡوَقۡتِ ٱلۡمَعۡلُومِ (३८) (उसने कहा: ऐ मेरे रब! मुझे उस दिन तक की मोहलत दे जब लोग दोबारा उठाए जाएंगे। अल्लाह ने फ़रमाया: तो यक़ीनन तू मोहलत दिए गए लोगों में से है, एक जाने हुए वक़्त के दिन तक)। और फिर दुआ भी इतनी बड़ी की है कि किसी नबी ने भी आज तक नहीं की।

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हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!
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हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!

(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल्लाह का नूर (प्रकाश) है जो बंदे के सीने में रोशन हो जाता है। यह नूर दिल में चिराग की लौ की तरह पूरी तरह महसूस होता है। ब...