मरने से पहले अब्बा जी के दर्शन (ज़ियारत):
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Ummah Post
18 November, 2024

मरने से पहले अब्बा जी के दर्शन (ज़ियारत):

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हज़रत मौलाना मोहम्मद अली जौहर (रह.) की बेटी बीमार हुईं, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। वह युवा थीं। माँ ने पूछा, "कोई आखिरी तमन्ना, कोई आखिरी ख्वाहिश?" बेटी ने कहा, "अब्बा जी को देखने का जी चाहता है।" माँ ने खत लिखवा दिया। युवा बेटी का खत परदेस में मिला कि, "मैं अपनी उम्र की आखिरी घड़ियाँ गिन रही हूँ, दिल की आखिरी तमन्ना है कि अब्बा हुज़ूर तशरीफ लाएं तो मैं आपका दीदार कर लूँ।" कितनी बड़ी बात थी! हज़रत को वह खत मिला, तो हज़रत मौलाना मोहम्मद अली जौहर (रह.) ने उस खत की पीठ पर दो शेर लिखकर वह खत वापस भेज दिया। बेटी को इस हाल में क्या जवाब लिखा, फरमाते हैं:

मैं तो मजबूर हूँ, अल्लाह तो मजबूर नहीं,

तुझसे मैं दूर हूँ, वह तो मगर दूर नहीं।

तेरी सेहत हमें मँज़ूर है, लेकिन उसको

नहीं मँज़ूर तो फिर हमको भी मँज़ूर नहीं।

यह कैफियत (अवस्था) नसीब हो जाए तो ज़िंदगी का मज़ा आ जाए। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमारे लिए अपनी यह मोहब्बत आसान फरमा दे। आमीन। (खुत्बात, पेज 115 - 1)

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किताब: अल्लाह की मोहब्बत पैदा करने का तरीका

पेज नंबर: 94

लेखक: हज़रत मौलाना पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक्शबंदी

चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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लेख

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