लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो…!!
मुनाफ़िक़ (पाखंडी) को नज़रअंदाज़ कर दो,
बुरे (पन्ने) को फाड़ दो…
और सबसे ख़ूबसूरत पर रुक जाओ।
इंसान भी किताबों की तरह होते हैं,
कुछ लोग सिर्फ़ कवर (मुखपृष्ठ) से धोखा देते हैं,
जबकि कुछ की आंतरिक सामग्री (अंदरूनी मवाद) हैरान करने वाली होती है
भले ही उनका कवर बिल्कुल साधारण सा लगता हो।
पहली नज़र में प्रभावित न हो,
वक़्त हर चीज़ का फ़ैसला कर देता है…!!
ज़िंदगी की किताब को ग़ौर से पढ़ो,
हर पन्ना एक नया सबक़ (पाठ) सिखाता है…