लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो…!!

मुना...
Ummah Post
19 November, 2024

लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो…!!

मुनाफ़िक़ (पाखंडी) को नज़रअंदाज़ कर दो,

बुरे (पन्ने) को फाड़ दो…

और सबसे ख़ूबसूरत पर रुक जाओ।

इंसान भी किताबों की तरह होते हैं,

कुछ लोग सिर्फ़ कवर (मुखपृष्ठ) से धोखा देते हैं,

जबकि कुछ की आंतरिक सामग्री (अंदरूनी मवाद) हैरान करने वाली होती है

भले ही उनका कवर बिल्कुल साधारण सा लगता हो।

पहली नज़र में प्रभावित न हो,

वक़्त हर चीज़ का फ़ैसला कर देता है…!!

ज़िंदगी की किताब को ग़ौर से पढ़ो,

हर पन्ना एक नया सबक़ (पाठ) सिखाता है…

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एक माँ द्वारा हलाल और हराम का ख़ूबसूरत सबक़
लेख

एक माँ द्वारा हलाल और हराम का ख़ूबसूरत सबक़

यह कहानी डॉक्टर मोहम्मद रातिब अल-नाबुलसी की है जो वह अपनी माँ के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि एक दिन जब वह छोटे थे, उनकी माँ ने उनसे पूछा: "क्या तुम शब्द 'हलाल' कह सकते हो बिना अपने होठों को बंद किए?" उन्होंने कोशिश की और कामयाबी के साथ शब्द 'हलाल' कह लिया बिना अपने होठों को बंद किए।...