*एक दामाद अपने ससुराल गया। सास ने पूछा, "बैंगन शरीफ़ पका लूं...
Ummah Post
22 November, 2024

*एक दामाद अपने ससुराल गया। सास ने पूछा, "बैंगन शरीफ़ पका लूं या भिंडी मुबारक या पालक पाक खाना पसंद करेंगे?" दामाद बोला, "मैं गुनहगार बंदा हूं, बिना वज़ू इन मुक़द्दस (पवित्र) सब्ज़ियों के नाम लेने के क़ाबिल भी कहां! कोई बेग़ैरत आवारा सा मुर्ग़ा ही पका लें।" 🤓*

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हज़रत अबू क़िलाबा के सब्र व शुक्र की मर्क़ूम कहानी
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हज़रत अबू क़िलाबा के सब्र व शुक्र की मर्क़ूम कहानी

हज़रत अबू क़िलाबा रहमतुल्लाह अलैह एक जलील-उल-क़द्र (उच्च कोटि के) ताबेई और बहुत बड़े मुहद्दिस (हदीस के विद्वान) हैं। वह हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु के शागिर्द हैं। आप बसरा में रहते थे और अपने ज़माने के अत्यंत साबिर व शाकिर (धैर्यवान और कृतज्ञ) इंसान थे। इतिहास में आपके सब्र व शुक्र की एक घटना मिलती...