चंगेज़ ख़ान के दरबार में तीन लोगों की हत्या (मृत्युदंड) का आदेश हुआ, तो एक महिला रोती-चिल्लाती हुई दरबार में पहुँची। उनमें से एक महिला का पति था, दूसरा बेटा और तीसरा भाई था। चंगेज़ ख़ान ने महिला से कहा, "तुम इनमें से किसी एक का चयन कर लो, मैं उसकी सज़ा माफ़ कर दूँगा।" तो महिला कहने लगी, "पति दूसरा मिल जाएगा, बेटा भी दूसरा जन (पैदा कर) लूँगी, लेकिन भाई का कोई विकल्प (बदल) नहीं मिल सकता।" (इसलिए मैं भाई का ही चयन करती हूँ)। चंगेज़ ख़ान को यह चयन पसंद आया, तो उसने तीनों की सज़ा माफ़ कर दी। (अल-बिदाया वन-निहाया, इब्न कसीर, अल-तुर्की संस्करण, दार हिज्र 17 / 166)
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