अजमेर दरगाह में मंदिर होने का दावा सामने आया है। दीवान के वारिस सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन हर दरगाह और मस्जिद में मंदिर के दावे को उचित नहीं समझते। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और वे मजबूती से अपना रुख पेश करेंगे। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को तय की है, जिसमें दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और पुरातत्व विभाग (आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट) को नोटिस भेजा गया है।
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