✍🏻"गुनाहों की वजह से पैदा होने वाली नहूसतें (दुर्भाग्य/अशुभ प्रभाव) तावीज़ और अमलियात (टोटकों) से ख़त्म नहीं की जा सकतीं, बल्कि उनके ख़ात्मे के लिए तौबा (क्षमा) और तक़्वा (परहेज़गारी) इख़्तियार करना ज़रूरी है।"✅✅💯💯
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