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इंसान का यह बदन मिट्टी से बना है और मिट्टी ही में मि...
Ummah Post
27 July, 2024

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इंसान का यह बदन मिट्टी से बना है और मिट्टी ही में मिल जाएगा। क़ब्र में जाकर खूबसूरत आँखें जिन्हें सुरमा और काजल से सँवारा जाता है, और यह बाल और रुख़सार (गाल) जिन्हें हसीन-ओ-जमील (सुंदर) बनाने की जद्दोजहद की जाती है, और यह पेट जिसकी भूख मिटाने के लिए हर तरह के जतन किए जाते हैं—यही आँखें फूटेंगी और उनका पानी चेहरे के रुख़सारों पर बह पड़ेगा, बाल खुद-ब-खुद गल कर टूट जाएँगे, पेट बदबूदार होकर फट पड़ेगा, क़ब्र में कीड़े इस मिट्टी के बदन को अपनी ग़िज़ा (भोजन) बना लेंगे। इस हालत को इंसान दुनिया में भूले रहता है, मगर यह हालत पेश आकर रहेगी। इसी तरफ़ तवज्जो (ध्यान) दिलाने के लिए एक मर्तबा आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज़रात-ए-सहबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) से इर्शाद फ़रमाया:

"रोज़ाना क़ब्र फसीह-ओ-बलीग़ (स्पष्ट और प्रभावशाली) ज़बान में बरमला (सरेआम) यह ऐलान करती है कि ऐ आदम की औलाद! तू मुझे कैसे भूल गया? क्या तुझे मालूम नहीं कि मैं तन्हाई का घर हूँ, मैं मुसाफ़िरत (परदेस) की जगह हूँ, मेरा मक़ाम वहशतनाक (भयानक) है, और मैं कीड़ों का घर हूँ, और मैं तंग जगह हूँ सिवाय उस शख़्स के लिए जिस पर अल्लाह तआला मुझे वसी (विशाल) फ़रमा दे! फिर आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इर्शाद फ़रमाया कि क़ब्र या तो जहन्नम के गड्ढों में से एक गड्ढा है, या जन्नत की फुलवारियों में से एक फुलवारी है।"

लिहाज़ा, अल्लाह तआला से शर्म-ओ-हया का तकाज़ा बयान करते हुए आनहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इर्शाद फ़रमाया: "कि अपनी मौत और बदन की बोसीदगी (गलने-सड़ने) को याद रखें! इससे फ़िक्र-ए-आख़िरत (परलोक की चिंता) पैदा होगी और गुनाहों से बचने का जज़्बा उभर कर सामने आएगा।"

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"ख़ुदा की क़सम! अगर आप अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा वासियों) पर ढाए जाने वाले मज़ालिम (अत्याचार) और तकलीफ़ें देखें तो आप दंग रह जाएं, ज़ेहन इस बात को स्वीकार नहीं कर पाएगा कि आख़िर एक इंसान इन तमाम मज़ालिम और तकलीफ़ों को बर्दाश्त करके ज़िंदा कैसे रह सकता है? और इन तकलीफ़ों की शिद्दत (तीव्रता) से उसकी मौत कैसे व...