"जिसकी आरज़ूएँ (इच्छाएँ) कम हो जाती हैं, उसकी ज़िन्दगी आसान...
Ummah Post
30 December, 2024

"जिसकी आरज़ूएँ (इच्छाएँ) कम हो जाती हैं, उसकी ज़िन्दगी आसान हो जाती है!"

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एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)
लेख

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़माने में पांच मर्तबा अज़ान देकर खुलेआम नमाज़ें पढ़ता था। यह सुनकर इस आजिज़ को हैरत हुई और पूछा: "वह कैसे?" उस नौजवान ने अपन...