मुस्तनद (प्रामाणिक) उलेमा को छोड़कर:
_ किसी चर्ब ज़बान (चिक...
Ummah Post
5 January, 2025

मुस्तनद (प्रामाणिक) उलेमा को छोड़कर:

_ किसी चर्ब ज़बान (चिकनी-चुपड़ी बातें करने वाले) यूट्यूबर

_ कहानी बाज़ इंजीनियर

_ लफ़्ज़ों के खिलाड़ी मोटिवेशनल स्पीकर

_ छछोरे मीडिया एंकर

_ अल्फ़ाज़ की मीनाकारी (शब्दों की सजावट) करने वाले फ़ेसबुकिया मुफ़क्कीर (विद्वान)

_ और लिबरल (उदारवादी) फ़िक्र रखने वाले डॉक्टरों

से दीन सीखने वालों की हालत भी यही होती है!

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अहंकार का बुरा अंत
लेख

अहंकार का बुरा अंत

यज़ीद बिन मलिक एक उमय्यद खलीफा थे, वह नए खलीफा थे जो उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ के बाद आए थे। एक दिन वह कहने लगे, "कौन कहता है कि बादशाहों को खुशियाँ नसीब नहीं होतीं...? मैं आज का दिन खुशी के साथ गुज़ार कर दिखाऊँगा, अब मैं देखता हूँ कि कौन मुझे रोकता है...?" उनसे कहा गया, "आजकल बगावत हो रही है, यह हो...